हिंदी कविता : ज़िन्दगी के डर छूना तो हर कोई चाहता है आसमान, पर इंसान धरती पर गिरने से डरता है उम्मीदों के दिए तो हर कोई जगाना चाहता है, पर इंसान दियो के बुझने से डरता है नदी में तैरना तो हर कोई चाहता है, पर इंसान पानी में डूबने से डरता है कामयाबी तो हर कोई चाहता है ज़िन्दगी मैं, पर इंसान कोशिश को करने से डरता है सोचता तो हर कोई है तरक्की को पाने का, पर इंसान कुछ नया करने से डरता है सपने तो हर कोई देखता है ज़िन्दगी मैं, पर इंसान सपनो पर विश्वास करने से डरता है दूसरों को काम करने की नसीयत तो हर कोई देता है, पर इंसान खुद उस काम को करने से डरता है भगवन को मानते तो हर कोई है, पर इंसान खुद से ज्यादा भगवन पर विश्वास करने से डरता है खुली हवा में सांस तो हर कोई लेना चाहता है, पर इंसान धूल भरी आंधी से डरता है अमीर तो हर कोई बनना चाहता है अपनी ज़िन्दगी मैं, पर इंसान आमीरी में छिपे लालचपने से डरता है पाना तो हर कोई चाहता है अपने लक्ष्य को, पर इंसान लक्ष्ये के ना पूरे होने के गम से डरता है जन्नत तो हर कोई पाना चाहता अपनी ज़िन्दगी मैं, पर इंसान ...