कुछ भी भूला नही मैं पापा | Father's Day Poem | पिता पर कविता | Hindi Poem on Papa
कुछ भी भुला नही मैं पापा, मुझे आज भी सब कुछ याद है वो पापा का चेतक स्कूटर पर आगे बिठाकर दिल्ली की गलियों की सैर करवाना वो पापा का बारिश के वक़्त अपना रेनकोट मुझपर ओढकर मुझे बारिश से बचवाना वो पापा का मॉनसून के मौसम में यमुना नदी में आई बाढ़ दिखलाना वो पापा का रात के वक़्त आते ही दरवाज़े के बाहर से स्कूटर का हॉर्न बजाना वो पापा का अपना मन्न मारकर मुझे मनपसंद खिलौने दिलवाना वो पापा का दूर तक उड़ी हुई पतंग मुझे देकर मेरी शान बढ़वाना कुछ भी भुला नही मैं पापा, मुझे आज भी सब कुछ याद है वो पापा का मेरे पढ़ाई में नम्बर कम आने पर मुझे प्रोत्साहन देना वो पापा का हर पल अपने जीवन का ज्ञान मुझे मेरी ज़िंदगी के लिए देना वो पापा का मम्मी की पिटाई से मुझे हमेशा बचवाना वो पापा का हर पल इस ज़िन्दगी में मेरी, मुझे एहम अहसास करवाना वो पापा का हर पल अपनी नींद को त्याग कर मुझे चैन की नींद सुलवाना वो पापा का मेरे जन्मदिन के अवसर पर पूरी कक्षा में टॉफ़ीस बटवाना कुछ भी भुला नही मैं पापा, मुझे आज भी सब कुछ याद है वो पापा का दीवाली की शाम मेरे मनपसंद पट...