नदी का ये पानी युही बहता चला जाएगा | ये पानी एक घाट से दूसरे घाट बढ़ता चला जायेगा || बहता पानी और गुज़रा हुआ वक़्त कभी भी वापस नही आये कभी | तभी तो जो तेरे नसीब का नही वो तुझे कभी चाह कर भी नही मिल पायेगा || °°°राहुल सप्रा°°°
कितने ही दरवाजे है इस तस्वीर में | कौन से दरवाजे से जाए इस बात पर विचार कुछ गंभीर है || ठीक युही असल जिंदगी में अक्सर होता है | पास सब कुछ हो कर भी न जाने क्या पाने का फितूर दिमाग में हर रोज़ है || ★★★राहुल सप्रा★★★
मासूमियत की कोई परिभाषा नही होती | इंसान हो या जानवर मन की अभिलाषा कम किसी की भी नही होती || ज़ुबान का खेल है सारा | बिना कहे तो किसी को भी यहां खाने को रोटी तक नसीब नही होती || ◆◆◆राहुल सप्रा◆◆◆