Poem on Pollution | Poem on Environment | पर्यावरण पर कविता
प्रदूषण के प्रकोप से इस दुनिया को बचाना है हो जाये पूरी दुनिया प्रदूषण मुक्त ये संदेश हर जगह आज हमको फैलाना है ले सके खुली हवा में ताज़ी साँस हम और हमारे आने वाली पीढ़ी बस इसी सोच के साथ प्रदूषण की इस लड़ाई से हमें लड़ते चले जाना है प्रदूषण के प्रकोप से इस दुनिया को बचाना है || आजकल तो प्रदूषण की सीमा का दायरा इतना है की जैसे मानो हर जगह बस प्रदूषण का ही फसाना है बच्चे जवान और बूढ़े अपने चेहरे पर प्रदूषण मुक्त ओढ़ना पहन कर निकलते घरों से बाहर प्रदूषण के प्रकोप को कम करके इस नई प्रथा का अब सफाया हम सबको करवाना है प्रदूषण के प्रकोप से इस दुनिया को बचाना है || प्रदूषण का काम हर रोज़ इंसान को घुट घुट के मारना है हो जाये पूरा भारत वर्ष प्रदूषण मुक्त मेरे दिल की यही कामना है ताज़गी भरी हो खुली हवा में जब भी कोई बाहर निकले इसी संकल्प के साथ प्रदूषण को नियंत्रण करने का प्रयास हर रोज़ ...