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जन्माष्टमी पर्व पर हिंदी कविता

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गोकुल के हमारे नटखट से ये नंदलाला बड़े मोहक से निराले से है हमारे ये नंदलाला अपनी हँसी से सबके मन को मोह लेते है हमारे ये नंदलाला वृन्दावन, मथुरा, गोकुल, नंदगाँव और बरसाने में आज भी बसें है हमारे ये नंदलाला नीति वन में गोपियों संग हर रोज़ रासलीला रचते है हमारे ये नंदलाला गोकुल के हमारे नटखट से ये नंदलाला माखन के तो जैसे दीवाने से है हमारे ये नंदलाला मासूम सा चेहरा बना कर ना जाने कितने ही घरों का माखन है चुराया हमेशा बस मुस्कुराते ही रहते है हमारे ये नंदलाला उनकी इसी अंदाज पर आज भी इस समाज में हर घर में पूजे जाते है हमारे ये नंदलाल गोकुल के हमारे नटखट से ये नंदलाला हर साल नंदलाला का जन्मदिन जन्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है सारे मंदिर और बाज़ारों को आलीशान ढंग से सजाया जाता है पूरे दिन नंदलाला के नाम का रखकर उपवास आधी रात को इनके जन्म होने पर प्रेम भाव से इनके नाम का प्रसाद पूरा होता है उपवास गोकुल के हमारे नटखट से ये नंदलाला

हिंदी कविता - त्योहार ये रक्षाबंधन का

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बहनो और भाइयों का त्योहार ये रक्षाबंधन का भाइयों की लंबी और खुशहाल ज़िंदगी के लिए बहनो द्वारा मनाया जाता है त्योहार ये रक्षाबंधन का सभी गीले शिकवे भुला कर हर वर्ष बड़े धूमधाम से मनाया जाता है त्योहार ये रक्षाबंधन का चाहे जितनी भी व्यस्त हो सभी बहने  बस दौड़ी चली आती है राखी अपने भाई को बांधने के लिए तभी तो अटूट रिश्ते का एक बेमिसाल उद्धरण है त्योहार ये रक्षाबंधन का बहनो और भाइयो का त्योहार ये रक्षाबंधन का बहने सुबह से ही सज धज के निकल पड़ती है अपने घर से भाई को जब तक रखी ना बाँध ले अन्न का एक निवाला तक नही खाती ये बहनें हमेशा अपने भाई की लंबी और खुशहाल ज़िन्दगी की दुआएं करती रहती ना जाने कैसे हर साल बहन और भाई के इस रिश्ते की कितनी ही नई मिसालें दे जाता है त्योहार ये रक्षाबंधन का बहनो और भाइयो का त्योहार ये रक्षाबंधन का कितनी बहनो और भाइयो को इस त्योहार को मनाने का अवसर ही नही मिल पाता नौकरियों, कारोबार और परिवार के चक्कर में भाई देश के एक कोने में तो बहन किसी दुसरे कोने में डाक से राखी अपने भाई को हर साल भेज देती है बहने औ...

मासूमियत

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मासूमियत की कोई परिभाषा नही होती | इंसान हो या जानवर मन की अभिलाषा कम किसी की भी नही होती || ज़ुबान का खेल है सारा | बिना कहे तो किसी को भी यहां खाने को रोटी तक नसीब नही होती || ◆◆◆राहुल सप्रा◆◆◆

पहाड़ों का पैगाम

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गगन चुम्बी और बर्फ से ढकी पहाड़ों की ये चोटिया कुछ ये बयान करती है | के जैसे जम के पड़ी हुई बर्फ अब तो बस कड़कते हुए सूरज का इंतजार करती है || ^^ राहुल सप्रा ^^