जल बिना जैसे जीवन संभव ही नही है | Save Water Poem | Poem On Water
जल बिना जैसे जीवन संभव ही नही है जल ना हो तो ये ज़िन्दगी फिर ज़िन्दगी ही नही है जल से शुरू होता हर दिन ये सबका जल से ही हर दिन का अंत है होता जल की नही किसी से भी है तुलना जल से ही हर घर का खाना है पकता जल से नाहा कर सकून है मिलता जल है जीवन ये हर कोई नही समझता जल के आसरे पूरा विश्व है चलता जल से ही खेतों में अनाज है उगता साफ जल में प्रतिबिंब है दिखता कलयुग के समय में जल बोतलों में है बिकता जल से ही समुन्द्र नदियों को वजूद है मिलता जल अपना रास्ता अपने आप है ढूढ़ता जल अपने बहाव से आग तक है बुझाता सूखे पड़े गाँव जल की हर बूंद को तरसता जल हो पीने लायक यही लक्ष्य हो हम सबका जल को प्रदूषित अब नही है करना जल में कई सारे जीवों का झुंड वास है करता इन जीवों की रक्षा करना हम सबका दायित्व है बनता जल तो जल है जल के जैसे ना दूजा कोई फिर भी जल की हर कोई...