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मेरा बेटा - शिवाय

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तेरे चेहरे पर इस खुशी के लिए मेरी इस ज़िन्दगी का हर लम्हा कुर्बान | तू जब पास ना हो तो जीने की क्या है फिर वजह || हस्ता रह मुस्कुराता रह हमेशा तू इसी तरह | मेरी इस नई दुनिया में खुशियों का है तू बड़ा सा दरिया || ~~~राहुल सप्रा~~~

अटल नही

ज़िन्दगी मैं ज़िन्दगी की सांसें अटल नही | आज बीत जाने के बाद कल का सूरज देखना भी अटल नही || आज देश ने अपना अनमोल रतन अटल जी को खो दिया | सारा जग जानता है उस अटल के सिवा दूसरा कोई अटल नही || महान इंसान स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को एक छोटे से कवि राहुल सप्रा की ओर से श्रंद्धाजलि

हिंदी कविता - वतन ये मेरा हिन्दुस्तान

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राहुल सप्रा प्रस्तुति हिंदी कविता - वतन ये मेरा हिन्दुस्तान वतन ये मेरा हिन्दुस्तान हिन्दुस्तान है वतन मेरा, इसपर है फर्क हमें पूरा  इस देश की तरक्की के लिए जितना भी हो पायेगा मरते दम तक करने की पुरी कोशिश करते रहेंगे मानते हैं के हम किसी फौज या फिर किसी राजनीति का हिस्सा नही, पर फिर भी अपने मुल्क को तरकी दिलवाने में कभी भी पीछे नही हटेंगे वतन ये मेरा हिन्दुस्तान वतन के लिए कुछ भी करने का जज़्बा रखता हैं हर हिन्दुस्तानी  वतन पर मर मिटने को भी सबसे पहले खड़ा होता है हर हिन्दुस्तानी यु तो कामयाबियों कि नई बुलंदियों हर दिन छूता है मेरा ये वतन पर दुनिया में हिंदुस्तान को सबसे सक्षम देश बनाने में आज भी जुटा है हर हिन्दुस्तानी वतन ये मेरा हिन्दुस्तान यहां कुछ ही कदमों पर भाषाएं बदल जाया करती है कोई भी शख्स जो हो अमीर से अमीर या फिर हो गरीब से गरीब, हर किसी को यहां खाने को दो वक्त की रोटी तो मिल जाया करती हैं अंग्रेजों से आज़ादी के बाद संसार में एक अलग पहचान मेरे वतन ने बनायी है जो इतने कम वक्त में ही अपनी अलग ही छाप इस ज़...

हिंदी कविता - सोच || Hindi Poetry On Life || By Rahul Sapra

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राहुल सप्रा प्रस्तुति हिंदी कविता - सोच चलो कुछ दास्तान सुनाता हूं हमारी सोच की सोच भरी जिंदगी की तलाश में सोच-सोच कर | यह सोच बन गई है कि अब क्या सोचे || हर लम्हे में कोई नई सोच दिमाग में आती है | सोच सोच में ही वह नई सोच बड़ी दूर तक हमें ले जाती है || चलो कुछ दास्तान सुनाता हूं हमारी सोच की पलभर में ही एक सोच दूसरी सोच में इस कदर खो जाती है | के जैसे खुले आसमान में कोई पंछी उड़ते उड़ते खो गया हो || सोच के अलग-अलग रूप हर रोज अलग-अलग सोच मन में लेकर आते हैं | वह अलग-अलग रूपों को सोच सोच से जोड़कर एक अलग दुनिया में ले जाते हैं || चलो कुछ दास्तान सुनाता हूं हमारी सोच की सोच किसी शख्स, किसी मुल्क की मोहताज नहीं, सोच के लिए ना ही कोई सरहद बनी है और ना ही बन पाएगी | यह तो वह चिड़िया है जो हमेशा पंख फैलाकर बस हवा में उड़ती चली जाएगी || चलो कुछ दास्तान सुनाता हूं हमारी सोच की कभी तो यह सोच बिना सोचे समझे ना जाने क्या-क्या सोचे जाए | तो कभी जितना भी जोर लगा लो सोच कुछ भी सुझा ना पाए || गुजरे वक्त के साथ सोच का तजुर्बा बढ़त...

हिंदी कविता - लम्हा-लम्हा

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लम्हा-लम्हा वक्त यूं ही गुजर जाएगा गुजरा हुआ वक्त लौट कर वापस कभी ना आएगा जो भी तुम्हारा है वह सब यही छूट जाएगा लम्हा-लम्हा वक्त यूं ही गुजर जाएगा गुजरी वक्त के साथ बस उसका एहसास ही रह जाएगा तुम नहीं भी होंगे फिर भी इस जग में सब कुछ यूं ही चलता चला जाएगा उम्मीद के आसरे हर इंसान हर पल को जीता है और जीता चला जाएगा तुम जितना भी कमा लो सब का सब बस यही बस यही छूट जाएगा लम्हा-लम्हा वक्त यूं ही गुजर जाएगा वक्त का लम्हा न कभी रुका है ना कभी किसी के लिए रुक पायेगा यह जमाना और ज्यादा रफ्तार से यूं ही बढ़ता चला जाएगा इंसान अपनी इंसानियत को दिन-ब-दिन और ज्यादा भूलता चला जाएगा वह दिन दूर नहीं जब इंसान ही इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन कहलाएगा लम्हा-लम्हा वक्त यूं ही गुजर जाएगा जो आज तेरा है वह कल किसी और का हो जाएगा यूं ही इस जिंदगी का चरखा चला है और चलता चला जाएगा सोचकर सिर्फ गुजरा हुआ वक्त हाथ में तेरे कुछ ना आएगा बढ़ता जा जिंदगी में हमेशा क्योंकि जो तेरे नसीब का है वह तेरे पास आज नहीं तो कल जरूर आएगा लम्हा-...

हिंदी कविता - उम्मीदों की कश्ती

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उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं आसरा उस खुदा का जिसने हर लम्हा कुछ सोच रखा हम सब के लिए कल क्या हो जाए क्या पता हर शक्स यहां खुद ही भगवान बना बैठा है उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं हर दिन कुछ नया करने की सोचते हैं सोचते सोचते दिन निकल जाता है फिर सोचते हैं कि कल सोचेंगे वह कल न जाने कब आएगा जो जिंदगी को नई राह दिखाएगा उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं जिंदगी भी क्या क्या पल दिखाती है रोशनी होते हुए भी अंधकार की ओर ले जाती है क्यों कर रहे हैं तकदीर से ज्यादा पाने की आस न जाने कब टूट जाए जिंदगी की है आस उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं चाहते वह हैं जो एक पूरी होने के बाद दूसरी आ जाए अपने चक्कर में इंसान को खूब घुमाये जिंदगी बीत जाती है चाहतों को पूरा करने में हुजूर कैसे इन छोटे-छोटे अरमानों पर अंकुश लगाएं उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं

हिंदी कविता - अजब गजब सी ज़िन्दगी

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राहुल सप्रा प्रस्तुति हिंदी कविता - अजब गजब सी ज़िन्दगी कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए किसी पल मैं ख़ुशी ही ख़ुशी हो, तो किसी दूसरे ही पल मैं सब वीराना हो जाए किसी पल में धूप निकली हो, तो किसी दूसरे ही पल मैं जम के घनी बारिश हो जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए  किसी पल मैं फल पके हो पेड़ पे, तो किसी दूसरे ही पल में पतझड़ हो जाए किसी पल ज़िन्दगी मैं सब कुछ हो, तू किसी दूसरे ही पल मैं सब उजड़ जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए  किसी पल लगता है अभी तो बहुत बची है ज़िन्दगी,  तू किसी दूसरे ही पल लगता है के कब ज़िन्दगी की साँसें रुक्सत हो जाए उम्मीद का दामन थामे बैठे रहते है हर पल, तो किसी दूसरे ही पल ना जाने कब ये उमीदें एक दूसरे की दुश्मन हो जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए  हर दिन सूरज अपनी रोशनी से धरती को रोशन करता है, तो किसी पल लगता है ना जाने कब ये रौशनी के दीये की लौ लुत्प हो जाए उम्मीदों की कश्ती पर ...

वक़्त - जीवन पर हिंदी कविता

वक़्त - जीवन पर हिंदी कविता वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है | बहते समंदर में दूर तक तैरने का जतन कर लेते है || ना जाने ये मैं क्या क्या सोचता रहता है हर पल | बस यूहीं मन को बहला फुसला कर दिल की बातें चार कर लेते है || वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है | वक़्त मिलता है तो वक़्त को कभी कभी बुद्धू बना लेते है | कभी वक़्त हमें नचाता है तो कभी हम खुद ही नाच लेते है || यु तो हर वक़्त एक जैसा नहीं होता | पर जब भी वक़्त हमारे पक्ष में होता है तो उसका फायदा जम के उठा लेते है || वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है | वक़्त मिलता है तो कभी गुज़रा वक़्त याद कर लेते है | जो भी अजब गजब सा ज़िन्दगी मैं हुआ उस पल को महसूस कर लेते है || सोच कर गुज़रा हुआ वक़्त एक नयी सी उम्मीद मन में ले आते है | उसी उम्मीद के दम पर दिल में कुछ नए इरादे पैदा कर लेते है || वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है | वक़्त मिलता है तो कभी बच्चों संग गली में बच्चे बन कर खेल लेते है | सफ़ेद कपड़ो को कीचड के रंग में जान मूछ कर रंग लेते है || काश वो बीता हुआ बचपन फिर स...

Sher O Shayari

Sher O Shayari performance on Office Family Day...have a look... Click below link for full recording : https://youtu.be/OmM002pI_kA

हिंदी कविता : ज़िन्दगी के डर

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हिंदी कविता : ज़िन्दगी के डर छूना तो हर कोई चाहता है आसमान, पर इंसान धरती पर गिरने से डरता है उम्मीदों के दिए तो हर कोई जगाना चाहता है, पर इंसान दियो के बुझने से डरता है नदी में तैरना तो हर कोई चाहता है, पर इंसान पानी में डूबने से डरता है कामयाबी तो हर कोई चाहता है ज़िन्दगी मैं, पर इंसान कोशिश को करने से डरता है सोचता तो हर कोई है तरक्की को पाने का, पर इंसान कुछ नया करने से डरता है सपने तो हर कोई देखता है ज़िन्दगी मैं, पर इंसान सपनो पर विश्वास करने से डरता है दूसरों को काम करने की नसीयत तो हर कोई देता है, पर इंसान खुद उस काम को करने से डरता है भगवन को मानते तो हर कोई है, पर इंसान खुद से ज्यादा भगवन पर विश्वास करने से डरता है खुली हवा में सांस तो हर कोई लेना चाहता है, पर इंसान धूल भरी आंधी से डरता है अमीर तो हर कोई बनना चाहता है अपनी ज़िन्दगी मैं, पर इंसान आमीरी में छिपे लालचपने से डरता है पाना तो हर कोई चाहता है अपने लक्ष्य को, पर इंसान लक्ष्ये के ना पूरे होने के गम से डरता है जन्नत तो हर कोई पाना चाहता अपनी ज़िन्दगी मैं, पर इंसान ...

हिंदी कविता : होली का त्यौहार

हिंदी कविता : होली का त्यौहार अलग अलग रंगों से भरा होता है ये होली का त्यौहार हरे लाल पीले नीले रंगों से मिलकर बनता है ये होली का त्यौहार होलिका दहन की पूजा से नया सा एहसास करवाता है ये होली का त्यौहार गर्मी की दस्तक देने का संकेत दे देता है ये होली का त्यौहार गुजियों के स्वाद से रूबरू करवाता है ये होली का त्यौहार गुलाल की महक से भरा होता है ये होली का त्यौहार वृन्दावन के मुरली मनोहर ने रचा है ये होली का त्यौहार गोकुल मे लात मार कर आज भी खेला जाता है ये होली का त्यौहार भांग पीकर मदहोश होकर मना लिया जाता है ये होली का त्यौहार हर इंसान अपने अलग ही अंदाज़ से मनाता है ये होली का त्यौहार पानी के गुब्बारे को एक दूसरे को मार कर मन लेते है ये होली का त्यौहार पिचकारी की धार से पानी एक दूसरे पर फेक कर खुशियां मनाते है ये होली का त्यौहार गाने बाजे के साथ नाचते गाते मस्ती में डुबो देता है ये होली का त्यौहार हिंदुस्तानी के साथ फिरंगी भी ज़बरदस्त तरीके से मनाता है ये होली का त्यौहार मजहब के नाम से परे हर शख्स के मन्न में खुशियां दे जाता ह...

हिंदी कविता : हमारा शिवाय

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नन्हा सा प्यारा सा है हमारा शिवाय कुछ दिनों पहले ही दुनिया में आया है हमारा शिवाय शिव शंकर के आशीर्वाद का वरदान है हमारा शिवाय घर के आँगन को फूलों की तरह महका चुका है हमारा शिवाय ज़िन्दगी जीने का नया अरमां है हमारा शिवाय नींद से भरी जैसे कोई तिजोरी है हमारा शिवाय ज़िन्दगी के सब गम भुलाकर खुशियाँ भर देता है हमारा शिवाय रातों की नींदें उड़ाने में खूब माहिर है हमारा शिवाय अपनी मन की मर्ज़ी का खुद ही मालिक है हमारा शिवाय रोते रोते कभी भी हस्स पड़ता है हमारा शिवाय जब मन करता है सोये, जब मन करता है रात भर हम सबको जगाता है हमारा शिवाय कभी लगता है ना जाने कितना कुछ सोचता रहता है हमारा शिवाय तो कभी लगता है बस रोता ही रहता है हमारा शिवाय इतनी जल्दी हम सबकी ज़िन्दगी मैं काफी अहम हो गया है हमारा शिवाय मुर्गे की बांग से पहले ही हम सबको जगा देता है हमारा शिवाय रोने और सोने में ही हर वक़्त व्यस्त रहता है हमारा शिवाय गोकुल के कान्हा की तरह बहुत नटखट है हमारा शिवाय दूध ना मिले तो पूरे घर को सर पे उठा लेते है हमारा शिवाय पूरे परिवार को नए रिश्ते की पहचान से जोड़ चुका ह...

हिंदी कविता : ज़िंदा हूँ

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हिंदी कविता : ज़िंदा हूँ तमाम उम्र गुज़र जाती है युही अंसुनि उनकहीं उलझनो मैं, ना जाने कौन सी नई उलझन में फसने के लिए ज़िंदा हूँ ज़ख्म पर मरहम तो बस वक़्त ही लगा पाता है, उस सही वक़्त के आने के इंतज़ार के लिए ज़िंदा हूँ उम्मीद की रोशनी कुछ ऐसी सी हो गयी है के दिखाई ही नहीं देती, हर लम्हा उस रोशनी की तलाश के लिए ज़िंदा हूँ ज़िन्दगी मैं दुःख के कारण खुशी से कई ज्यादा है, इसी दुःख सुख भारी ज़िन्दगी को जीने के लिए ज़िंदा हूँ किसी पल लगता है कि बस और कुछ नही बचा इस ज़िंदगी में, फिर भी ना जाने और कौन सी अनकही अनसुनी बातें कहने सुनने के लिए ज़िंदा हूँ डूबता सूरज और उगते हुए चाँद का वक़्त एक ही है, इस अजब गजब नज़ारे को हर रोज़ देखने के लिए ज़िंदा हूँ भागती चली जाती है सड़कों पर तमाम गाड़ियां, ना जाने कौन सी ना खत्म होने वाली भीड़ में फसने के लिए ज़िंदा हूँ चोट लगती है तो दर्द तम्माम उम्र तक रहता है, ना जाने और कितने दर्दों को सहने के लिए ज़िंदा हूँ हर दिन सुबह सूरज उगता है और शाम को डूब जाता है, क्या पता कौन सी वो आखरी सुबह देखने के लिए ज़िंदा हूँ ...

हिंदी कविता : ज़िन्दगी एक एहसास

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हिंदी कविता : ज़िन्दगी एक एहसास क्या हुआ जो वक़्त आज साथ नहीं है तेरे |  वक़्त ही तू है कोई खुदा थोड़ी है || मुसीबतों से लड़ते रेह जब तक है जान बाजुओ मैं तेरे | मुसीबत ही तू है कोई डरा सिंह थोड़ी है || कोशिश करने से कभी भी घबरा मत तू | मंज़िल को पाना या ना पाना तेरे हाथ में थोड़ी है || काँटों पर चलोगे तो कांटे तो पैर मैं लगेंगे ही | काँटे ही तो है कोई बंदूक की गोली थोड़ी है || हर पल लगता है कि बस ख़ुशी ही रहे इस जीवन में हमेशा | पर गम के बिना जीने में कोई मज़ा थोड़ी है || हस्ता रेह हमेशा ज़िन्दगी मैं तू | हसने पर कोई जीएसटी थोड़ी है || उमीदों की कोई सीमा नही होती | उमींद है कोई वागाह बॉर्डर थोड़ी है || मरने के बाद सब जन्नत जाना चाहते है | पर जीने से पहले मरना थोड़ी है || विदेश जाने की होड़ लगी है आजकल | पर अपने देश में किसी चीज़ की कमी थोड़ी है || डर डर के क्यों जीता है इस ज़िन्दगी मैं तू | डर ही तो है ओसामा बिन लादेन थोड़ी है || चलते रहो ज़िन्दगी के सफ़र में कदम बढाकर | इस...