वक़्त - जीवन पर हिंदी कविता

वक़्त - जीवन पर हिंदी कविता

वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है |
बहते समंदर में दूर तक तैरने का जतन कर लेते है ||
ना जाने ये मैं क्या क्या सोचता रहता है हर पल |
बस यूहीं मन को बहला फुसला कर दिल की बातें चार कर लेते है ||
वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है |

वक़्त मिलता है तो वक़्त को कभी कभी बुद्धू बना लेते है |
कभी वक़्त हमें नचाता है तो कभी हम खुद ही नाच लेते है ||
यु तो हर वक़्त एक जैसा नहीं होता |
पर जब भी वक़्त हमारे पक्ष में होता है तो उसका फायदा जम के उठा लेते है ||
वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है |

वक़्त मिलता है तो कभी गुज़रा वक़्त याद कर लेते है |
जो भी अजब गजब सा ज़िन्दगी मैं हुआ उस पल को महसूस कर लेते है ||
सोच कर गुज़रा हुआ वक़्त एक नयी सी उम्मीद मन में ले आते है |
उसी उम्मीद के दम पर दिल में कुछ नए इरादे पैदा कर लेते है ||
वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है |

वक़्त मिलता है तो कभी बच्चों संग गली में बच्चे बन कर खेल लेते है |
सफ़ेद कपड़ो को कीचड के रंग में जान मूछ कर रंग लेते है ||
काश वो बीता हुआ बचपन फिर से लौट कर आ जाए |
बस इसी इंतज़ार में ज़िन्दगी का एक और दिन काम कर लेते है ||
वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है |

वक़्त मिलता है तो कभी यूहीं शायरी लिख लेते है |
शब्दों के रेगिस्तान से कुछ नए शब्द एक एक करके चुन लेते है ||
किसी लम्हा लगता है कि बस और शायद कोई शायरी ना लिख पाऊं |
फिर ना जाने कैसे कुछ नए शब्दों को जोड़ मोड़ कर एक और नयी शायरी लिख लेते है ||
वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है |

~~राहुल सप्रा~~

For full recording of Poetry, click on below link :
https://www.youtube.com/watch?v=EMwmsxGLQeQ&t=45s



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