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हिंदी कविता - अजब गजब सी ज़िन्दगी

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राहुल सप्रा प्रस्तुति हिंदी कविता - अजब गजब सी ज़िन्दगी कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए किसी पल मैं ख़ुशी ही ख़ुशी हो, तो किसी दूसरे ही पल मैं सब वीराना हो जाए किसी पल में धूप निकली हो, तो किसी दूसरे ही पल मैं जम के घनी बारिश हो जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए  किसी पल मैं फल पके हो पेड़ पे, तो किसी दूसरे ही पल में पतझड़ हो जाए किसी पल ज़िन्दगी मैं सब कुछ हो, तू किसी दूसरे ही पल मैं सब उजड़ जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए  किसी पल लगता है अभी तो बहुत बची है ज़िन्दगी,  तू किसी दूसरे ही पल लगता है के कब ज़िन्दगी की साँसें रुक्सत हो जाए उम्मीद का दामन थामे बैठे रहते है हर पल, तो किसी दूसरे ही पल ना जाने कब ये उमीदें एक दूसरे की दुश्मन हो जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए  हर दिन सूरज अपनी रोशनी से धरती को रोशन करता है, तो किसी पल लगता है ना जाने कब ये रौशनी के दीये की लौ लुत्प हो जाए उम्मीदों की कश्ती पर ...

वक़्त - जीवन पर हिंदी कविता

वक़्त - जीवन पर हिंदी कविता वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है | बहते समंदर में दूर तक तैरने का जतन कर लेते है || ना जाने ये मैं क्या क्या सोचता रहता है हर पल | बस यूहीं मन को बहला फुसला कर दिल की बातें चार कर लेते है || वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है | वक़्त मिलता है तो वक़्त को कभी कभी बुद्धू बना लेते है | कभी वक़्त हमें नचाता है तो कभी हम खुद ही नाच लेते है || यु तो हर वक़्त एक जैसा नहीं होता | पर जब भी वक़्त हमारे पक्ष में होता है तो उसका फायदा जम के उठा लेते है || वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है | वक़्त मिलता है तो कभी गुज़रा वक़्त याद कर लेते है | जो भी अजब गजब सा ज़िन्दगी मैं हुआ उस पल को महसूस कर लेते है || सोच कर गुज़रा हुआ वक़्त एक नयी सी उम्मीद मन में ले आते है | उसी उम्मीद के दम पर दिल में कुछ नए इरादे पैदा कर लेते है || वक़्त मिलता है तो कभी खुद से बात कर लेते है | वक़्त मिलता है तो कभी बच्चों संग गली में बच्चे बन कर खेल लेते है | सफ़ेद कपड़ो को कीचड के रंग में जान मूछ कर रंग लेते है || काश वो बीता हुआ बचपन फिर स...