हिंदी कविता - अजब गजब सी ज़िन्दगी
राहुल सप्रा प्रस्तुति हिंदी कविता - अजब गजब सी ज़िन्दगी कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए किसी पल मैं ख़ुशी ही ख़ुशी हो, तो किसी दूसरे ही पल मैं सब वीराना हो जाए किसी पल में धूप निकली हो, तो किसी दूसरे ही पल मैं जम के घनी बारिश हो जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए किसी पल मैं फल पके हो पेड़ पे, तो किसी दूसरे ही पल में पतझड़ हो जाए किसी पल ज़िन्दगी मैं सब कुछ हो, तू किसी दूसरे ही पल मैं सब उजड़ जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए किसी पल लगता है अभी तो बहुत बची है ज़िन्दगी, तू किसी दूसरे ही पल लगता है के कब ज़िन्दगी की साँसें रुक्सत हो जाए उम्मीद का दामन थामे बैठे रहते है हर पल, तो किसी दूसरे ही पल ना जाने कब ये उमीदें एक दूसरे की दुश्मन हो जाए कुछ नहीं पता इस ज़िन्दगी का, ना जाने कब यहाँ क्या हो जाए हर दिन सूरज अपनी रोशनी से धरती को रोशन करता है, तो किसी पल लगता है ना जाने कब ये रौशनी के दीये की लौ लुत्प हो जाए उम्मीदों की कश्ती पर ...