होली की कविता | Holi Poem | Holi Aayee
फिर से इस वर्ष की होली है आयी अलग अलग रंगों को मिलाकर एक नया रंग है दिखलाने फिर से इस वर्ष की होली है आयी अपने उन सतरंगी रंगों से हर शख्स को अपने रंग में डुबोने फिर से इस वर्ष की होली है आयी स्वादिष्ट पकवानों जैसे गुजिया खीर इत्यादि के मधुर स्वाद से रूबरू हर शख्स को ये होली हर साल करवाती है अपनो के साथ मिलकर इस अनोखे जशन का एहसास कुछ अलग सा ये होली करवाती है मासूमियत भरे समाज में खुशी की एक अलग सी लहर चलवाने फिर से इस वर्ष की होली है आयी बच्चे बड़े या फिर हो चाहे कोई बुजुर्ग , हर कोई अपने ढंग से इस त्योहार का आनंद लेता है गाढ़े रंग से अगर किसी को बैर हो तो गुलाल के रंगों से तो हर कोई ही खेल लेता है हर रंग अपने आप में इतिहास की कोई अलग कहानी बयान करवाता है तभी तो भूत , वर्तमान और भविष्या के अनोखे संगम से रूबरू हमें करवाने फिर से इस वर्ष की होली है आयी कुछ तो है खास बा...