होली की कविता | Holi Poem | Holi Aayee


फिर से इस वर्ष की होली है आयी


अलग अलग रंगों को मिलाकर एक नया रंग है दिखलाने फिर से इस वर्ष की होली है आयी

अपने उन सतरंगी रंगों से हर शख्स को अपने रंग में डुबोने फिर से इस वर्ष की होली है आयी


स्वादिष्ट पकवानों जैसे गुजिया खीर इत्यादि के मधुर स्वाद से रूबरू हर शख्स को ये होली हर साल करवाती है

अपनो के साथ मिलकर इस अनोखे जशन का एहसास कुछ अलग सा  ये होली करवाती है

मासूमियत भरे समाज में खुशी की एक अलग सी लहर चलवाने फिर से इस वर्ष की होली है आयी




बच्चे बड़े या फिर हो चाहे कोई बुजुर्ग, हर कोई अपने ढंग से इस त्योहार का आनंद लेता है

गाढ़े रंग से अगर किसी को बैर हो तो गुलाल के रंगों से तो हर कोई ही खेल लेता है

हर रंग अपने आप में इतिहास की कोई अलग कहानी बयान करवाता है

तभी तो भूत, वर्तमान और भविष्या के अनोखे संगम से रूबरू हमें करवाने फिर से इस वर्ष की होली है आयी



कुछ तो है खास बात इस वर्ष की होली में

ना जाने क्यों लाल रंग इतना आकर्षित है कर रहा हर हिन्दुस्तानी को

इस होली पर दुआ है ऊपर वाले से के हो जाये हमेशा के लिए खात्मा आतंकवाद और आतंवादियों का इस जहांन से

तभी तो हर हिन्दुस्तानी में ये नया जोश लेकर फिर से इस वर्ष की होली है आयी



कई जगह इस रंगों भरे त्योहार की आड़ में नियम और कानून को बेहद बुरे तरीके से तोड़ा जाता है

दिखावे की आड़ में मासूमियत के गले को घोंटा जाता है 

वैसे तो हर त्योहार को खुशी खुशी मिलकर सबके साथ मनाना चाइए 

तभी तो इस बदलते हुए मौसम में इंसान की सोच को बदलने फिर से इस वर्ष की होली है आयी

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