उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं आसरा उस खुदा का जिसने हर लम्हा कुछ सोच रखा हम सब के लिए कल क्या हो जाए क्या पता हर शक्स यहां खुद ही भगवान बना बैठा है उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं हर दिन कुछ नया करने की सोचते हैं सोचते सोचते दिन निकल जाता है फिर सोचते हैं कि कल सोचेंगे वह कल न जाने कब आएगा जो जिंदगी को नई राह दिखाएगा उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं जिंदगी भी क्या क्या पल दिखाती है रोशनी होते हुए भी अंधकार की ओर ले जाती है क्यों कर रहे हैं तकदीर से ज्यादा पाने की आस न जाने कब टूट जाए जिंदगी की है आस उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं चाहते वह हैं जो एक पूरी होने के बाद दूसरी आ जाए अपने चक्कर में इंसान को खूब घुमाये जिंदगी बीत जाती है चाहतों को पूरा करने में हुजूर कैसे इन छोटे-छोटे अरमानों पर अंकुश लगाएं उम्मीदों की कश्ती पर सवारी किया जा रहे हैं
साढ़े प्रमुख त्योहारा विचों ए प्रमुख त्योहार लोहड़ी दा है फिर तो आया सारे पास्से खुशियां दी नवी दास्तान नु फैलान लोहड़ी दा ए त्योहारा है लाया वैसे ते पंजाबी जिथे वी होवे बड़े उत्साह दे नाल मनान इस त्योहार नु बाबा जी दी रहमत दे नाल चार चाँद है लाग जांदे वड्डे इस लोहड़ी दे त्योहार नु 13 जनवरी नु आवे हर साल ए लोहड़ी दा त्योहार , बच्चा जवान या फिर होवे कोई बुज़ुर्ग पूरे साल अपनी एक वखरी जई छाप छोड़ जावे ए लोहड़ी दा त्योहार शादी दे बाद दी पहली लोहड़ी होवे या फिर होवे पहले बच्चे दी , सारे रिश्तेदार होके कठे लोहड़ी दे त्योहार दे जशन नु ज़िन्दगी भर लई यादगार बना जांदे कपकपढ़ि सर्दी दे विच एक वखरा ही आनंद आवे लोहड़ी दी आग विच हाथां नु सकण दा , मुंगफली रेवड़ी गचक दा वखरा स्वाद सालों साल याद करवांदा त्योहार लोहड़ी दा हर पास्से सारे पान जम के भंगड़ा की वड्डा या होवे कोई निक्का , वखरी मस्ती दे शोर दे नाल गूंज जांदा पूरा जहान एस लोहड़ी दे त्योहार विच हर मज़हब दे लोग वाद चाड के इस जशन दा हिस्सा है बंदे , सारे कथे ...
घाट नदी का लहराता हुआ नदी का पानी जब मिलता है घाट से | कुछ तो है मन में जो वो पानी कहना चाहता है घाट से || एक मधुर सी आवाज़ से सबका मन मोह लेता ये पानी और घाट का संगम | तभी तो वो पानी एक अनोखा सा रिश्ता हर लहर के साथ जोड़ जाता है घाट से || ¶¶¶ राहुल सप्रा ¶¶¶
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