हिंदी कविता : ज़िन्दगी एक एहसास
हिंदी कविता : ज़िन्दगी एक एहसास
क्या हुआ जो वक़्त आज साथ नहीं है तेरे |
वक़्त ही तू है कोई खुदा थोड़ी है ||
मुसीबतों से लड़ते रेह जब तक है जान बाजुओ मैं तेरे |
मुसीबत ही तू है कोई डरा सिंह थोड़ी है ||
कोशिश करने से कभी भी घबरा मत तू | मंज़िल को पाना या ना पाना तेरे हाथ में थोड़ी है ||
काँटों पर चलोगे तो कांटे तो पैर
मैं लगेंगे ही |
काँटे ही तो है कोई बंदूक की गोली थोड़ी है ||
हर पल लगता है कि बस ख़ुशी ही रहे इस जीवन में हमेशा |
पर गम के बिना जीने में कोई मज़ा थोड़ी है ||
हस्ता रेह हमेशा ज़िन्दगी मैं तू |
हसने पर कोई जीएसटी थोड़ी है ||
उमीदों की कोई सीमा नही होती |
मरने के बाद सब जन्नत जाना चाहते है | पर जीने से पहले मरना थोड़ी है ||
विदेश जाने की होड़ लगी है आजकल | पर अपने देश में किसी चीज़ की कमी थोड़ी है ||
डर डर के क्यों जीता है इस ज़िन्दगी मैं तू |
डर ही तो है ओसामा बिन लादेन थोड़ी है ||
चलते रहो ज़िन्दगी के सफ़र में कदम बढाकर |
इस सफर की कोई टिकट थोड़ी है ||
आसमान की ऊंचाई और धरती की गहराई कितनी है नहीं पता |
ये सब कुदरत है कोई पैमाना थोड़ी है ||
रख लेते है मैं मैं कई बातें एकसाथ एकजगह |
इन् बातों का कोई मज़हब थोड़ी है ||

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