हिंदी कविता : हमारा शिवाय
नन्हा सा प्यारा सा है हमारा शिवाय
कुछ दिनों पहले ही दुनिया में आया है हमारा शिवाय
शिव शंकर के आशीर्वाद का वरदान है हमारा शिवाय
घर के आँगन को फूलों की तरह महका चुका है हमारा शिवाय
ज़िन्दगी जीने का नया अरमां है हमारा शिवाय
नींद से भरी जैसे कोई तिजोरी है हमारा शिवाय
ज़िन्दगी के सब गम भुलाकर खुशियाँ भर देता है हमारा शिवाय
अपनी मन की मर्ज़ी का खुद ही मालिक है हमारा शिवाय
रोते रोते कभी भी हस्स पड़ता है हमारा शिवाय
जब मन करता है सोये, जब मन करता है रात भर हम सबको जगाता है हमारा शिवाय
कभी लगता है ना जाने कितना कुछ सोचता रहता है हमारा शिवाय
तो कभी लगता है बस रोता ही रहता है हमारा शिवाय
इतनी जल्दी हम सबकी ज़िन्दगी मैं काफी अहम हो गया है हमारा शिवाय
मुर्गे की बांग से पहले ही हम सबको जगा देता है हमारा शिवाय
रोने और सोने में ही हर वक़्त व्यस्त रहता है हमारा शिवाय
गोकुल के कान्हा की तरह बहुत नटखट है हमारा शिवाय
दूध ना मिले तो पूरे घर को सर पे उठा लेते है हमारा शिवाय
पूरे परिवार को नए रिश्ते की पहचान से जोड़ चुका है हमारा शिवाय
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