जन्माष्टमी पर्व पर हिंदी कविता
गोकुल के हमारे नटखट से ये नंदलाला
बड़े मोहक से निराले से है हमारे ये नंदलाला
अपनी हँसी से सबके मन को मोह लेते है हमारे ये नंदलाला
वृन्दावन, मथुरा, गोकुल, नंदगाँव और बरसाने में आज भी बसें है हमारे ये नंदलाला
नीति वन में गोपियों संग हर रोज़ रासलीला रचते है हमारे ये नंदलाला
गोकुल के हमारे नटखट से ये नंदलाला
माखन के तो जैसे दीवाने से है हमारे ये नंदलाला
मासूम सा चेहरा बना कर ना जाने कितने ही घरों का माखन है चुराया
हमेशा बस मुस्कुराते ही रहते है हमारे ये नंदलाला
उनकी इसी अंदाज पर आज भी इस समाज में हर घर में पूजे जाते है हमारे ये नंदलाल
गोकुल के हमारे नटखट से ये नंदलाला
हर साल नंदलाला का जन्मदिन जन्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है
सारे मंदिर और बाज़ारों को आलीशान ढंग से सजाया जाता है
पूरे दिन नंदलाला के नाम का रखकर उपवास
आधी रात को इनके जन्म होने पर प्रेम भाव से इनके नाम का प्रसाद पूरा होता है उपवास
गोकुल के हमारे नटखट से ये नंदलाला
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