उम्मीदों की कस्ती

उम्मीदों की कस्ती पर सवारी की जा रहे है...

आसरा उस खुदा का है जिसे हर लम्हे में कुछ सोच रखा है हम सबके लिए, कब क्या हो गया है क्या पता, हर शक आज कल खुदा बनाया है...

उम्मीदों की कसी पर सवारी की जा रहे है....

हर दिन कुछ नया करने का सोचा है, सोचते सोचते दिन निकल जाते और फिर सोचते हैं कल मिलेंगे, ये कल ना जाने कब आएंगे जू जिंदगी कू नई रह दिखाय...

उम्मीदों की कसी पर सवारी की जा रहे है....

जिंदगी भी क्या पल दीखाती है, रोशनी हूटे हुए भी अंधकार की और ली जाती है, क्यू करे तकदीर देखें ज्यादा पाने की आस, ना जाने कब टूट जाए जीने की ये ... ....

उम्मीदों की कसी पर सवारी की जा रहे है....

चाहतें वू है जू एक पूरी हूं पर दुसरी जाए, अपने चक्कर मैं इंसान कू खोब घूमे, जिंदगी बीट जाती है चाहतें पूरी करने में हजार, कैसे इन छोटे छुटे अरमान अब पाबंदी...

उम्मीदों की कसी पर सवारी की जा रहे है...



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