World Laughter Day Shayari | Hassi Par Kavita


जाने कहाँ खो सी गयी है आजकल चहरे से ये हँसी

सब कुछ है पर फिर भी इसकी इतनी क्यों है कमी

शरीर के मानसिक संतुलन को बनाये रखती है ये हँसी

मुफ्त की चीज़ है पर मेहेंगी चीज़ों आज भी भारी पड़ती है ये हँसी

जाने कहाँ खो सी गयी है आजकल चहरे से ये हँसी




है हँसना इतना ज़रूरी जितना ज़रूरी है साँस लेना

है हँसना इतना ज़रूरी जितना जरूरी है नोट कमाना

है हँसना इतना ज़रूरी जितना ज़रूरी है रात में सोना

इतनी ज़रूरी होने के बावजूद भी जाने फिर कहाँ खो सा गया है आजकल हँसना

जाने कहाँ खो सी गयी है आजकल चहरे से ये हँसी ||



हसने की वजह को आजकल जैसे कोई वजह सी बना चुके है हम

ज़रूरत से भी कुछ कम हसने में ना जाने क्यों इतना विश्वास रखते है हम

हस्सी जीने की नई उप्लब्धधिया है दिलवाती ये बात सब जानते है हम

फिर भी पता नही क्यो हँसी भूल कर बस हर वक़्त अपनी जेबें भरने में बस लगे पड़े है हम

जाने कहाँ खो सी गयी है आजकल चहरे से ये हँसी ||

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