Labour Day Shayari | Labour Day Poem
किसी
बच्चे के मजदूरी करने
के पीछे कही ना
कही तो छुपी हुई
कोई मजबूरी सी है
ना चाहते हुए भी हो
रही आजकल जाने ये
कैसी दुर्गति सी है
देश
के विकास इन बच्चों से
ही ये तो एकदम
स्पष्ठ है
इतनी
सी बात समझने में
ना जाने हम सबको
ओर कितनी देरी सी है
क्योकि
यहाँ बच्चें मजबूर है मजदूरी करने
को ||
बच्चो
को अछी शिक्षा का
संकल्प आज दिलवाना है
हो जाए हर बच्चा
सक्षम पढ़ने लिखने में
इस समाज को नया
पैगाम ये भिजवाना है
यू बच्चो से मजदूरी करवाना
एक कलंक के समान
है
बच्चा
पढ़ाओ देश उज्ज्वल बनाओ
ये नारा पूरे देश
में आज हम सबको
फैलाना है |
क्योकि
यहाँ बच्चें मजबूर है मजदूरी करने
को ||
बच्चें
दिमाग से नही दिल
से सोचा करते है
बोले
जो कोई बड़ा कोई
भी काम उसे बिना
सोचे समझे बस कर
दिया करते है
आज हम सबको ये
दृढ़ निष्चय है करना
चाहे
जो भी हो जाये
मजदूरी के नाम पर
कभी किसी बच्चे से
उसका बचपन को नही
छीनना है ||
क्योकि
यहाँ बच्चें मजबूर है मजदूरी करने
को ||
Comments
Post a Comment