पुलवामा - दर्द भरी कविता | Pulwama Poem | Pulwama Attack | Desh Ke Sainik | पुलवामा श्रद्धांजलि

है जो नम आज ये आँखे हमारे इस देश के हर इंसान की
है जो छाया मातम उन शहीदों के घरों और गलियों में आज
कब तक मेरे देश का सैनिक युही अपनी जान की बाज़ी खेलता चला जायेगा
ना जाने कब मेरा ये भारत आतंकवाद मुक्त भारत कहलायेगा ||



हुआ जो पुलवामा में आतंकियो का वो दर्दनाक दिल दहला देने वाला जो हमला

ले ली थी जान उन 40 बहादुर सिपाहियों की जब धोखे से उन आतंकियों ने बड़ी बेरहमी से


पूरे देश में है छाया जैसे मोन का ये अजीब सा आलम है

आँखों में नमी है और उस रात के बाद जैसे कोई सुकून से सो ही नही पाया है

ना जाने कब मेरा ये भारत आतंकवाद मुक्त भारत कहलायेगा


जब से हुआ है जन्म इस पाकिस्तान मुल्क का

हमेशा पीछे से ही छुप छुप के वार है हमारे देश के जवानों पर इसने है किया

हो गयी है खत्म जैसे अब धैर्य की वो सीमा

अब तो ये ललकार है के मिट ही जाए हमेशा के लिए आतंकवाद के वो मंसूबे जो आज भी खुले आम घूम रहे है उस मुल्क पाकिस्तान में

ना जाने कब मेरा ये भारत आतंकवाद मुक्त भारत कहलायेगा


देश के लिए देश पर अपनी जान निसार हस्ते हस्ते जो कर जाते है

सच कहु जो इस धरती माँ के असली सपूत वो सैनिक ही कहलाते है

हो जाना चाहिए अब आतंवाद से मुक्त ये हिन्दुस्तान मुल्क मेरा

फिर चाहे मिट ही क्यो ना जाये मानचित्र से नाम पूरे इस देश पाकिस्तान का

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