गाँधी जयंती पर हिंदी कविता
आज़ादी पर अंग्रेजो को धूल थी जिसने चटवाई, निकल पड़े थे अकेले ही आज़ादी दिलवाने की कसम थी जिसने खाई ||
पूरा जहांन कॉप उठा था सुनकर इनके किस्से, बूढ़े बच्चे या फिर हो कोई जवान हर कोई साथ था इनके लड़ने आज़ादी की वो लड़ाई ||
हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है इनकी जयंती, इस दिन सुबह से ही होते है इनकी ही बहादुरी के महान चर्चे ||
अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम कर दी थी जिसने, उसके जन्म दिवस पर उसको याद करने की वो घड़ी है फिर से आई ||
विनम्रता भरे अपने स्वभाव से लाठी के सहारे ना जाने कितने ही आंदोलन थे जिसने किये, स्वतंत्रता
दिलवाने में खुद की ज़िंदगी को ही जीना जो थे गए भूल ||
आज भी दुनिया जिनको प्यार से बापू कहकर है पुकारती, उस महात्मा गांधी को हर हिन्दुस्तानी का है कोटि कोटि नमन ||
अब गांधी जयंती को स्वछता दिवस के तौर पर भी मनाया है जाता, क्योकि अंग्रेजों की सफाई के बाद अब अपने इस भारत देश को गंदगी से है दिलवानी आज़ादी ||
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