Motivational Poem - इमारते

ईंट से ईंट मिलकर बन जाती है ऊँची ऊँची इमारते |
अपनी ऊँचाई से गगन को जैसे छू सी लेती है ये ईमारते ||

पुरानी से पुरानी या फिर हो नई से नई ये इमारते |
अपनी उद्बुद्ध बनी बनावट से सबका मन मोह लेती है ये इमारते ||

★★★राहुल सप्रा★★★

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