गणेश देवा | Lord Ganesha Poem in Hindi | Ganpati Poem | Bappa Ka Tyohaar | Ganpati Poetry

दुख हरते कष्ठ निवारते सबके प्यारे हमारे श्री गणेश देवा

अपने सभी भक्तों को हर साल गणेश चतुर्थी पर दर्शन दे जाते हमारे श्री गणेश देवा

जम के लड्डूओं का भोग लगा जाते हमारे श्री गणेश देवा

पूजन में अपने पापा शिवजी से भी पहले पूजे जाते हमारे श्री गणेश देवा



हर साल अपने आने से घर को मन्दिर में बदल जाते हमारे श्री गणेश देवा

हर शख्स की मनोकामना को पूर्ण है करते हमारे श्री गणेश देवा

चूहे की सवारी से अपनी अलग ही शान है बनाते हमारे श्री गणेश देवा

त्योहारों का फिर से वापस आने का आघास करवाते हमारे श्री गणेश देवा

एक अलग ही अंदाज़ में लाल बाग के राजा के आसन पर विराजमान हो जाते हमारे श्री गणेश देवा

विसर्जन के वक़्त मुम्बई शहर के पूरे समुद्र पर अपना कब्ज़ा जमा लेते हमारे श्री गणेश देवा

बड़ी धूमधाम और हर्षोल्लास से विदाई ले जाते हमारे श्री गणेश देवा



जाते समय आने वाले साल में फिर से लौटने का वादा कर जाते हमारे श्री गणेश देवा

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